हरिद्वार। कभी-कभी ज़िंदगी का सबसे बड़ा नुकसान बहुत छोटी-सी ज़िद से शुरू होता है। महज़ ₹100 के पार्किंग शुल्क को लेकर हुआ विवाद एक मेहनतकश इंसान की जान ले गया और दो पढ़े-लिखे युवकों की पूरी ज़िंदगी सलाखों के पीछे धकेल दी। यह सिर्फ़ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि संवेदनहीनता, जल्दबाज़ी और कानून की अवहेलना का कड़वा सच है।
नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्किंग में 10 जनवरी, शनिवार को पार्किंग शुल्क को लेकर हुए विवाद ने भयावह मोड़ ले लिया। हरियाणा से आए यात्रियों और पार्किंग मैनेजर सहदेव कुमार के बीच कहासुनी हुई। बात इतनी बढ़ी कि वैगनआर कार चालक ने बैरियर तोड़ते हुए कार दौड़ा दी और सहदेव कुमार को कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल सहदेव को जॉलीग्रांट अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई। नगर कोतवाली प्रभारी रितेश शाह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच तेज़ी से पूरी की और आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
कौन हैं आरोपी?
इस मामले ने इसलिए भी समाज को झकझोर दिया क्योंकि आरोपियों में एक वकील है और दूसरा एलएलबी का छात्र।
- सूरज—पेशे से वकील
- विशाल—उसका भांजा, जो एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है
दोनों रुड़की में परीक्षा दिलाने आए थे और परीक्षा अवधि के दौरान हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे। कार विशाल चला रहा था। बताया जा रहा है कि वकील सूरज ने पार्किंग शुल्क देने के लिए रुपये भी दिए थे, लेकिन विशाल ने भुगतान नहीं किया। जल्दबाज़ी और ग़लत फ़ैसले में विशाल ने कार तेज़ कर दी। सहदेव चौहान ने रोकने की कोशिश की—पहली टक्कर लगी, फिर दूसरी। सहदेव उछलकर बोनट पर गिरा और ज़मीन पर जा गिरा। कुछ ही देर में एक परिवार की दुनिया उजड़ गई।
टूट गया एक घर
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पिछले महीने ही सहदेव चौहान ने अपने बेटे की शादी की थी। घर में खुशियों का माहौल था, जो एक पल में मातम में बदल गया। ₹100 बचाने की कोशिश ने एक ईमानदार कर्मचारी की जान ले ली और उसके परिवार को ऐसा दुख दे दिया जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
पुलिस की तत्परता
इस पूरे मामले में नगर कोतवाली पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। टीम में प्रभारी रितेश शाह, एसएसआई नन्द किशोर ग्वाड़ी, चौकी प्रभारी एसआई चरण सिंह चौहान, एएसआई संदीप वर्मा तथा कांस्टेबल राकेश, पवन और दिनेश शामिल रहे। तेज़ कार्रवाई ने यह संदेश साफ़ कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
एक कड़वा सच
सैकड़ों अक्लमंद मिलते हैं,
काम के लोग चंद मिलते हैं,
जब मुसीबत आती है,
तब पुलिस के अलावा,
सबके दरवाज़े बंद मिलते हैं…
यह घटना हमें याद दिलाती है कि कानून का सम्मान, धैर्य और मानवीय संवेदना—तीनों एक साथ ज़रूरी हैं। वरना छोटी-सी नासमझी न सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी बर्बाद करती है, बल्कि किसी और के घर का चिराग भी बुझा देती है।
सलाम खाकी
रुड़की, उत्तराखंड से
पत्रकार: तसलीम अहमद (विशेष रिपोर्ट)
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