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कोरोना काल में भी ट्राफिक व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे ट्रैफिक प्रभारी खबर सूत्रों से ओवरलोड ट्रकों से बड़े स्तर पर चल रहा लेनदेन सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की जगह लोगों को जूझना पड़ रहा लंबे जाम से

कोरोना काल में भी ट्राफिक व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे ट्रैफिक प्रभारी
खबर सूत्रों से ओवरलोड ट्रकों से बड़े स्तर पर चल रहा लेनदेन
सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की जगह लोगों को जूझना पड़ रहा लंबे जाम से
 आखिर जाम के झाम में कौन विभाग निभा रहा खलनायक की भूमिका
अपनी खराब सड़कों को सही करने में शर्म कर रहा लोक निर्माण विभाग

             नसीम सिद्दकी की रिपोर्ट

उरई। जनपद जालौन में समस्याओं का अंबार आज से नहीं देश के आजादी के वक्त से लगा हुआ है।बुंदेलखंड प्यासो की धरती मानी जाती है। यहां पर लोग सबसे पहले तो पानी के लिए धरती के साथ नदी तालाबों से जूझते हैं। उसके बाद यहां के करप्शन भरे विभागों से। वैसे बुंदेलखंड की धरती पर किसान सोना उगाने तक की हिम्मत रखते हैं।(यह एक कहावत है) अगर सहयोग शासन-प्रशासन दे तो वही बुंदेलखंड में एक चीज और चर्चा का विषय बनी रहती है। जो जनपद जालौन की एक छोटी सी चौकी से लेकर विधानसभा में चर्चा का विषय है। नदियों के पास बने बालू घाट। वह बालू घाट जिसमें निकलने वाली  बालू को लोग लाल सोना कहते हैं। नदियों का सीना चीर कर पहले तो बालू घाट संचालक अपनी जेब भरेंगे उसके बाद करप्शन भरे हर विभाग की खानापूर्ति करेंगे। घाट संचालक आभेलना सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और सत्ता पक्ष के मुख्यमंत्रियों तक के आदेशों तक की कर डालते हैं। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद बालू घाटों पर पोकलैंड मशीन नहीं चलाई जाती है। लेकिन बुंदेलखंड के जितने घाट हैं वहां पर कंपलसरी पोकलेन मशीन से ही खुदाई होती है। यह तो घाट संचालकों और उच्च अधिकारी शासन प्रशासन की बातें हैं। किस तरह नियमों का पालन कराने। वह खुद  करा लेंगे अगर पालन नहीं कराते हैं। तो कहीं ना कहीं वह भी इस भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। अब आपको जनपद जालौन भ्रष्टाचार में लिप्त विभागों से आपको रूबरू कराते हैं। इस समय ट्रैफिक विभाग बड़ी सुर्खियां बटोर रहा है। जिसको लोग ओवरलोड ट्रक का संचालन जनपद में मान रहे। जनपद जालौन के मुख्यालय उरई में स्थित कोंच रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था एकदम ध्वस्त हो चुकी है, यह देखने को आपको रोज हर घंटे में मिल जाएगा। जहां पर ट्रैफिक प्रभारी चालान काटते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर कोंच बस स्टैंड के कुछ आगे की खत्री की बगिया के पास लोग जाम के झाम से जूझते रहते हैं। यह जाम एक या 2 दिन नहीं या 1 हफ्ते नहीं हर घंटे लगा रहता है। जिस से जूझ रहे लोगों का कहना है, यही रहता है ट्राफिक व्यवस्था एकदम धड़ाम हो चुकी है। यह जाम सिर्फ ओवरलोड ट्रकों की वजह से लगता है, हम ओवरलोड ट्रक इसलिए कह रहे क्योंकि खाली ट्रक बड़ी आसानी से निकल जाते हैं। ओवरलोड ट्रक फस जाते। क्योंकि सड़क के साथ मोड पर बनी पुलिया एकदम ध्वस्त हो चुकी है। और ध्वस्त सड़क पुलिया पर ओवरलोड ट्रक फस जाते ओर जाम धीरे-धीरे करके विकराल रूप ले लेता है।ऐसा नहीं कि यातायात प्रभारी जाम को खुलवाने के लिए कुछ ना करते हो। लेकिन व्यवस्था उन्हीं की द्वारा बनाई गई है, और व्यवस्था में खुद मकड़जाल की तरह बदल जाते हैं। देखा जाए तो इसमें लोक निर्माण विभाग की भी लापरवाही सामने आ रही भ्रष्टाचार में लिप्त रहने वाले लोक निर्माण विभाग एक पुलिया बनवाने के लिए  एक साल भी कम पड़ गई। क्यों की पत्रकारों द्वारा लगभग छह सात माह पहले इस बात से लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया था। लेकिन अभी तक पुलिया का निर्माण ना हो सका। वहीं सूत्रों का कहना है कि ओवरलोड ट्रक आखिर हाईवे से क्यों नहीं जाते अंदर से ओवरलोड ट्रक लाने में किसको फायदा हो रहा कहीं ना कहीं इस भ्रष्टाचारी में ट्राफिक से कोई ना कोई लिप्त है।



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कोरोना काल में जाम के जाम से सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियां


जैसा की ज्ञात है, देश के साथ विश्व भर में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने तबाही मचा रखी है। ऐसे में देश के साथ भी विदेश के वैज्ञानिक , डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने सोशल डिस्टेंसिंग को इस वायरस से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना है। लेकिन जनपद जालौन के मुख्यालय उरई में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां हर घंटे में उड़ रही है। बाजार में जाम लगा तो कहीं बाजार के बाहर साथ अन सड़कों पर ओवरलोड ट्रकों से जाम लगा।किसी को जाम में फंसने से कोई लाभ नहीं मिल रहा और इतनी गर्मी में कोई जाम में फंसा भी नहीं चाहता लेकिन मजबूरी ही लोगों को उस जाम में फंसा रही है। ट्राफिक व्यवस्था ही कुछ ऐसी है जो लोगों के लिए खतरे के निशान बनती जा रही।अगर ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधरी तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।



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ओवरलोड ट्रकों पर किसकी है मेहरबानी


देखा जाए तो जाम का मुख्य कारण ओवरलोड ट्रक और ट्रैफिक कि ध्वस्त व्यवस्था को प्रमुखता से देखा जा रहा। वहीं सूत्रों का कहना है कि बालू घाटों की सीमा से जनपद की अंत तक की छोर की सीमा तक ओवरलोड ट्रक निकालने पर हर एक छोटे से लेकर बड़े कुछ विभागों के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों और दलालों की जेब गर्म करने पड़ती है। नहीं देखा जाए तो कुछ माह पहले व्यवस्था यह की गई थी कि ओवरलोड ट्रक हाईवे से जाएंगे और खाली ट्रक कोंच रोड से लेकिनकुछ जिम्मेदार अधिकारियों की जेब गर्म इस व्यवस्था से नहीं हो रही थी। उन्होंने व्यवस्था चेंज कर फिर से व्यवस्था रिश्वतखोर वाली कर दी।



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एक विभाग नहीं कई विभाग है, रिश्वतखोरी में लिप्त


अगर देखा जाए तो जनपद जालौन में रिश्वतखोरी में एक विभाग नहीं कई विभाग लिप्त हैं। और जाम के झाम का कारण विभाग में बैठे कई अधिकारी खलनायक की भूमिका निभा रहे। क्योंकि एक ट्रक अगर ओवरलोड बालू लेकर जाता है, तो कई विभाग उस पर कार्रवाई करते हैं। जब कई विभाग एक ओवरलोड ट्रक पर कार्रवाई करते हैं। तो अन्य ट्रकों पर कार्रवाई नहीं होती है। तो सभी विभाग उतना ही जिम्मेदार या रिश्वतखोर हैं, जब एक ट्रक पर कार्रवाई हो सकती तो सभी पर  क्यों नहीं।

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