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लखनऊ न्यूज:- नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा पत्रकारों से अभद्रता, ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए एससी एसटी एक्ट में मुकदमा लिखवाने की दी धमकी। योगी राज में चौथा स्तंभ खतरे में, अपनी काली करतूतों को छुपाने में लगा नगर आयुक्त लखनऊ

नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा पत्रकारों से अभद्रता, ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए एससी एसटी एक्ट में मुकदमा लिखवाने की दी धमकी।

योगी राज में चौथा स्तंभ खतरे में, अपनी काली करतूतों को छुपाने में लगा नगर आयुक्त लखनऊ


लखनऊ:
लॉकडाउन का 21 वा दिन दिनांक 14/04/2020 को दैनिक किरण कमल समाचार पत्र के संवाददाता जीत नारायण को नगर निगम ज़ोन 2 गुलजार नगर लखनऊ के निवासियों द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि जब से लॉकडाउन हुआ है यानी 25/03/2020 से, तब से इस क्षेत्र में एक बार भी नगर निगम द्वारा खाना वितरण नही हुआ है, तभी से हमलोग बहुत परेशान है, हम लोगों की मदद करने वाला कोई नही कृपया हम लोगो की मदद करें। जब पत्रकार ने पूछा कि आपके क्षेत्र के सभासद द्वारा मदद नही की जा रही तो उनका कहना था कि एक बार उनके द्वारा खाद्य सामग्री बटवाई गई थी जिसे दो-तीन दिन ही खाना बन पाया, लेकिन उसके बाद से किसी ने भी हमारी मदद नहीं की और ना ही कभी नगर निगम के द्वारा खाना बांटा गया। जब इसकी जानकारी के लिए पत्रकार द्वारा नगर निगम 2 की जोनल ऑफिसर संगीता कुमारी से सीयूजी नम्बर 6389300009 से वार्ता करने का प्रयास किया तो फोन की घंटी बजती रही लेकिन उनका फोन नही उठा, उसके बाद जब पत्रकार ने नगर आयुक्त लखनऊ इंद्रमणि त्रिपाठी को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराते हुए संगीता कुमारी जी के बारे में  बताया तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए पीड़ितों का नंबर मांगा, नगर आयुक्त अपने घमंड में इतना चूर थे कि वो यह भूल गये की यह काम आपके द्वारा नियुक्त अधिकारियों का है न कि किसी पत्रकार का, जब दूसरे दिन दिनांक 15/04/2020 को समय लगभग 3 बजके 34 मिनट पर फोन कर खाना वितरण की जानकारी के लिये जोनल ऑफिसर से फोन पर जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि नगर अभियंता अमरनाथ के द्वारा खाना वितरण का कार्य किया जा रहा है कृपया आप उनसे बात कर ले, जब पत्रकार द्वारा पूछा गया कि अगर इस तरीके से आप पत्रकार को भ्रमित कर रही है तो आम आदमी को कैसे भोजन वितरित करा पाती होंगी इससे यह स्पष्ट होता है कि इनके व नगर निगम के उच्च अधिकारियों द्वारा कितना भोजन और कहां कहां बांटा जा रहा है जब पत्रकार ने कहा इस पूरे मामले की खबर चलनी चाहिए तो जोनल ऑफिसर द्वारा संतोष जनक जवाब नहीं मिला, तभी पत्रकार ने तत्काल इंद्रमणि त्रिपाठी से फोन पर वार्ता कर पूरे मामले से अवगत कराया जिसमें यह भी बताया गया कि कल से आज तक समय दोपहर लगभग 3:30 बजे गुलजार नगर जोन 2 में भोजन वितरण नहीं कराया गया है तभी इंद्रमणि त्रिपाठी नगर आयुक्त लखनऊ आक्रोशित होकर पत्रकार पर ही बरस पड़े और कहा की हम लोग अपने पैसों से लोगों की मदद कर रहे हैं और कुछ कार्य आप लोग अपने पैसों से लोगों की मदद करें वही पत्रकार द्वारा बताया गया कि हम लोगों द्वारा भोजन वितरण व खाद्य सामग्री बटवाया जा चुका है जिसकी खबर भी पूर्व में प्रकाशित हो चुकी है इतनी बात सुनते ही नगर आयुक्त आक्रोशित होकर पत्रकार से फोन पर अभद्रता करने लगे।
शायद नगर आयुक्त यह भूल गए कि  पत्रकार भोजन अपने लिए नहीं मांग रहा था गरीब लोगों के लिए मांग रहा था, जैसा कि योगी आदित्यनाथ जी द्वारा बराबर कहा जा रहा है कि गरीबो को नगर निगम द्वारा खाना बटवाया जा रहा है जिसकी सूची भी जारी की जा चुकी है, बावजूद इसके नगर आयुक्त द्वारा पत्रकार को एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराने की धमकी तक दे डाली।
उसके बाद पत्रकार ने नगर आयुक्त से कहा कि खबर चलाना मेरा मौलिक अधिकार है।
शायद नगर आयुक्त ये भूल गये की पत्रकार बिना साक्ष्य के कोई बात नही करता, जितनी भी बातें इस खबर में लिखी है वह सब सत्य व ऑन रिकार्ड है।
जिसकी पुस्टि पत्रकार से कभी भी जा सकती है।
जब पत्रकारों को नगर आयुक्त  मुकदमे में फसाने का सडयंत्र कर सकते है, तो इनसे कौन जवाब सवाल करेगा इनका मतलब ये है कि ये जो भी कार्य करें पत्रकार उनका समर्थन करें। नगर आयुक्त यह बात भूल गये की हर पत्रकार बिकाऊ नही होता।
 अगर नगर आयुक्त व नगर निगम के कर्मचारी अच्छा कार्य करेंगें तो उनकी सराहना होगी लेकिन जब कोई भी कार्य कहीं भी गलत हो रहा होगा तो, वही पत्रकार उसे समाज, प्रशासन व शासन को खबर के माध्यम से उजागर भी करते रहे है और करते रहेंगे।

अब अगर पत्रकार ही आम जनता की आवाज बनकर अधिकारियों के कान तक नहीं पहुंचाएगा तो क्या आम जनता स्वयम इस लॉकडाउन का उलंघन कर भूखे पेट पुलिस की लाठी खाकर किस अधिकारी तक पहुंच पाएगी।

जीत नारायण लखनऊ संवाददाता

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