मेरठ में जिला न्यायाधीश, जिलाधिकारी और एसएसपी का संयुक्त निरीक्षण। समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—किशोरों, बच्चों और महिलाओं—की सुरक्षा, देखभाल और सुविधाओं को परखने के उद्देश्य से आज एक अहम प्रशासनिक पहल देखने को मिली। मा0 जिला न्यायाधीश अनुपम कुमार, जिलाधिकारी डॉ0 वी0के0 सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन ताड़ा ने संयुक्त रूप से राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर, सूरजकुंड बाल गृह तथा राजकीय पश्चातवर्ती देखरेख संगठन, लालकुर्ती (नारी निकेतन) का निरीक्षण किया।
किशोरों से सीधी बातचीत, व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत
निरीक्षण की शुरुआत राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर से हुई, जहाँ अधिकारियों ने किशोरों से संवाद कर खान-पान, दवाइयों की उपलब्धता, न्यायालय में पेशी सहित अन्य आवश्यक विषयों पर जानकारी ली। इस दौरान व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।सूरजकुंड बाल गृह में शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर
इसके बाद टीम सूरजकुंड बाल गृह पहुँची। यहाँ मा0 जिला न्यायाधीश एवं जिलाधिकारी ने बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति जानी। शिशु सदन का भी निरीक्षण किया गया और बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक सुझाव दिए गए।
नारी निकेतन में सुरक्षा और सुविधाओं की समीक्षा
निरीक्षण के अंतिम चरण में लालकुर्ती स्थित नारी निकेतन में बालिकाओं को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बच्चों से सीधे संवाद कर आहार, शिक्षा और देखरेख से जुड़े पहलुओं पर जानकारी ली और व्यवस्थाओं को मानक अनुरूप बनाए रखने के निर्देश दिए।सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
इस पूरे निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों का स्टाफ एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। यह पहल स्पष्ट संदेश देती है कि प्रशासन संवेदनशील संस्थानों की निगरानी को प्राथमिकता देते हुए बच्चों और महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।सैंकड़ों अक्लमंद मिलते हैं,
काम के लोग चंद मिलते हैं,
जब मुसीबत आती है,
तब पुलिस के अलावा,
सबके दरवाजे बंद मिलते हैं…!!
पुलिस विभाग को समर्पित देश की एकमात्र पत्रिका “सलाम खाकी” के लिए
मेरठ, उत्तर प्रदेश से—पत्रकार मनीष सिंह की खास रिपोर्ट
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