हिसार वासियों के चिंता भरी खबर है। डीसी कॉलोनी निवासी कोरोना पॉजिटिव रहे और फिर मृत हुए 63 वर्षीय बुजुर्ग के 60 वर्षीय भाई की भी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 14 दिन पहले भी जब सैंपल लिया गया था तो कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। मगर अब फिर से सैंपल लिया तो रविवार को पता चला कि मृतक के भाई को भी कोरोना है। वहीं अब प्रशासन में हड़कंप मच गया है क्योंकि कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग के अन्य परिवार के लोगों को भी संक्रमण हो सकता है। कम्युनिटी ट्रांसफर का यह हिसार में पहला मामला सामने आया है।
बता दें कि डीसी कॉलोनी में पहले कोरोना पॉजिटिव मिले बुजुर्ग के बाद से ही प्रशासन ने डीसी कॉलोनी को कंटेनमेंट जोन घोषित किया हुआ है। शनिवार को ही 14 दिन की अवधि पूरी होने पर नाके हटाए गए थे, मगर शाम को फिर से नाके लगा दिए गए थे। रविवार को सुबह वही हुआ जिसका डर था और यहां एक ओर कोरोना पॉजिटिव मिल गया है।
कोरोना पॉजिटिव रहे बुजुर्ग की मौत के बाद सेक्टर-16-17 स्थित श्मशान घाट में गुरुवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया था। बुजुर्ग की बुधवार शाम मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में पूरी एहतियात बरती गई और परिवार के चार लोगों सहित जीव वैज्ञानिक डा. रमेश पूनिया ने पीपीई किट डालकर उनका अंतिम संस्कार किया था। गौरतलब है कि बुजुर्ग की दूसरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। वहीं इसके बाद की तीन रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद वो कोरोना से मुक्ति पा चुके थे। लेकिन डॉक्टरों की हिदायतानुसार परिवार के लोगों ने पीपीई किट डालकर पूरे एहतियात के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
डॉक्टरों ने घोषित किया था कोरोनावायरस से मुक्त
डॉक्टरों ने बुजुर्ग को कोरोना वायरस से मुक्त घोषित कर दिया था। लेकिन डायबिटीज की समस्या, किडनी फेल, निमोनिया और बीपी कम होने की वजह से बुधवार देर शाम उनकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। गौरतलब है कि बुजुर्ग को 30 मार्च को शहर के जिंदल अस्पताल में दाखिल किया गया था, यहां उनका 2 अप्रैल को सैंपल हुआ था, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बाद 5 अप्रैल को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। अब उनके भाई के पॉजिटिव मिलने के बाद यह जानना और समझना ज्यादा मुश्किल हो गया है कि वायरस इतने दिनों तक सैंपल जांच में सामने क्यों नहीं आया।
बता दें कि डीसी कॉलोनी में पहले कोरोना पॉजिटिव मिले बुजुर्ग के बाद से ही प्रशासन ने डीसी कॉलोनी को कंटेनमेंट जोन घोषित किया हुआ है। शनिवार को ही 14 दिन की अवधि पूरी होने पर नाके हटाए गए थे, मगर शाम को फिर से नाके लगा दिए गए थे। रविवार को सुबह वही हुआ जिसका डर था और यहां एक ओर कोरोना पॉजिटिव मिल गया है।
कोरोना पॉजिटिव रहे बुजुर्ग की मौत के बाद सेक्टर-16-17 स्थित श्मशान घाट में गुरुवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया था। बुजुर्ग की बुधवार शाम मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में पूरी एहतियात बरती गई और परिवार के चार लोगों सहित जीव वैज्ञानिक डा. रमेश पूनिया ने पीपीई किट डालकर उनका अंतिम संस्कार किया था। गौरतलब है कि बुजुर्ग की दूसरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। वहीं इसके बाद की तीन रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद वो कोरोना से मुक्ति पा चुके थे। लेकिन डॉक्टरों की हिदायतानुसार परिवार के लोगों ने पीपीई किट डालकर पूरे एहतियात के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
डॉक्टरों ने घोषित किया था कोरोनावायरस से मुक्त
डॉक्टरों ने बुजुर्ग को कोरोना वायरस से मुक्त घोषित कर दिया था। लेकिन डायबिटीज की समस्या, किडनी फेल, निमोनिया और बीपी कम होने की वजह से बुधवार देर शाम उनकी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। गौरतलब है कि बुजुर्ग को 30 मार्च को शहर के जिंदल अस्पताल में दाखिल किया गया था, यहां उनका 2 अप्रैल को सैंपल हुआ था, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बाद 5 अप्रैल को उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। अब उनके भाई के पॉजिटिव मिलने के बाद यह जानना और समझना ज्यादा मुश्किल हो गया है कि वायरस इतने दिनों तक सैंपल जांच में सामने क्यों नहीं आया।

No comments:
Post a Comment