हिंदी दिवस के अवसर पर हुआ गोष्ठी का आयोजन
ललितपुर (उ०प्र०) 10 जनवरी 2020
शुक्रवार को आरएबीडी महाविद्यालय हंसरी मड़ावरा में विश्व हिंदी दिवस मनाया गया। इस दौरान पर प्राचार्य डॉ राघवेन्द्र सिंह राजपूत ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलित किया। तदोपरान्त मौजूद रहे प्रबुद्धजनों ने बारी बारी से हिंदी भाषा के विषयक विचार व्यक्त किये।
राजनीति प्रवक्ता आरके सुडेले ने बताया हिंदी हमारी राजभाषा है और इसे हमें किसी भी अन्य भाषा से कम नहीं समझना चाहिए। प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। इसीलिए इस दिन को हम विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। हिंदी के बहुत सारे कवि व लेखक ऐसे हैं। जिन्होंने हिंदी भाषा को बहुत महत्व दिया और उसे आगे बढ़ाया।
समाज शास्त्र प्रवक्ता संतोष यादव ने बताया भारत में सभी स्कूलों में हिंदी अनिवार्य रूप से विषय है और सभी विद्यालयों में पढ़ाया जाता है हिंदी के लिए सभी बालकों में अनुराग पैदा करना ही विश्व हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की,
हिंदी प्रवक्ता दीप्ति नामदेव ने बताया कोई भी देश बिना मातृभाषा के प्रयोग के तरक्की नहीं कर सकता।
इस कारण हिंदी भाषा को जनसामान्य द्वारा प्रयोग किया जाना अनिवार्य है। हिंदी भारत ही नहीं बल्कि मॉरीशस की राजभाषा है विश्व के 30 से भी अधिक देश हिंदी भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किए हुए हैं। वर्तमान में बहुत सारे विषयों को मान्यता प्राप्त है। लेकिन हिंदी का अपना अलग एक जज्बा है। अंग्रेजी हमारी कागजी कार्यवाही की भाषा हो सकती है, लेकिन हमारी मातृभाषा नहीं बन सकती गृह विज्ञान प्रवक्ता नीतू यादव ने बताया हिंदी हमारी जनमानस की भाषा है और इस को आगे बढ़ाना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
इस अवसर पर बीएस गौर, मनोहर लाल कुशवाहा, संपूर्णा जैन, आरती तोमर, रागिनी सेंगर, आशू गोस्वामी, आरजी चंदेल ,आरती भोड़ेले, अखंड प्रताप सिंह, अक्षय श्रीवास्तव, सचिन नामदेव, राहुल सोनी, जगदीश राजपूत, अंकित राजा राजीव यादव, विशाल, महेंद्र, भूपेंद्र, भगत, सुमेर, राममिलन, दयाल, कृपाल आदि उपस्थित रहे। संगोष्ठी का संचालन मनोहर लाल कुशवाहा ने और आभार संतोष कुमार सिंह ने व्यक्त किया।





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