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ललितपुर जनपद में भी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर मनाई गई लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 144 वी जयंती , राष्ट्रीय एकता की भी दिलाई गई शपथ ,

राष्ट्रीय एकता दिवस: शिक्षा के मंदिरों में हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई लौह पुरूष की जयंती



ललितपुर (उ०प्र०) 31 अक्टूबर 2019
 
विकास खण्ड मड़ावरा के शिक्षा के मंदिरों में हर्षोल्लास पूर्वक लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयन्ती मनाई गई। विद्यालयों में प्रभात फेरी निकालकर एकता दिवस की शपथ दिलायी गयी। विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ लौह पुरुष के चित्र पर माल्यापर्ण एवं पुष्पार्पण के साथ हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लौह पुरूष की जीवन गाथा सभी को बताई गई। सरस्वती मंदिर इण्टर कॉलेज मड़ावरा में प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति, सरस्वती मंदिर महाविद्यालय मड़ावरा में प्राचार्य डॉ. घूमन सिंह,  सीवी रमन एजुकेशन एकेडमी में प्रबंधक पुष्पेन्द्र सिंह यादव, सुमित विश्वास, प्रधानाध्यापक मदनमोहन पाल, प्राथमिक विद्यालय मड़ावरा-2 में प्रधानाचार्या आशा देवी, प्र.वि. प्रथम, प्र.वि द्वतीय, पू.मा.वि. डोंगराखुर्द में इं.प्र.अ. हकीमुद्दीन, दीपिका गुप्ता, स.अ. रबिन्द्र कुमार, अनुदेशक मानसिंह, अमित कुमार, पूर्व माध्यमिक विद्यालय दिदौनिया में इं.प्रा.अ. मनोज कुमार, प्रा. वि. रनगांव में प्र.अ. खिलावन सिंह द्वारा छात्र-छात्राओं को एकता दिवस की शपथ दिलाई गई। प्राथमिक विद्यालय मड़ावरा-2  में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

राष्ट्रीय एकता दिवस पर छात्र-छात्राओं को जानकारी देते हुए सरस्वती मंदिर इण्टर कॉलेज के प्रधानाचार्य रामसजीवन प्रजापति ने बताया कि सरदार बल्लभ भाई पटेल आजाद भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। देश की आजादी में वल्लभ भाई पटेल का बेहद खास योगदान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि कैसे मिली, साल 1928 में गुजरात में बारडोली सत्याग्रह हुआ जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया. यह प्रमुख किसान आंदोलन था. उस समय प्रांतीय सरकार किसानों से भारी लगान वसूल रही थी. सरकार ने लगान में 30 फीसदी वृद्धि कर दी थी. जिसके चलते किसान बेहद परेशान थे. वल्लभ भाई पटेल  ने सरकार की मनमानी का कड़ा विरोध किया, सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने की कोशिश में कई कठोर कदम उठाए. लेकिन अंत में विवश होकर सरकार को पटेल के आगे झुकना पड़ा और किसानों की मांगे पूरी करनी पड़ी, दो अधिकारियों की जांच के बाद लगान 30 फीसदी से 6 फीसदी कर दिया गया. बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि दी।

सरस्वती मंदिर महाविद्यालय में प्राचार्य डॉक्टर घूमन सिंह ने कहा कि सरदार पटेल ने 562 देशी रियासतों का एकीकरण किया। देश आजादी से पहले अलग-अलग रियासतों में बटा हुआ था। लौहपुरुष सरदार पटेल ने 562 रियासतों का भारत में विलय करवाया था। भारत का जो नक्शा ब्रिटिश शासन में खींचा गया था, उसकी 40 प्रतिशत भूमि इन देशी रियासतों के पास थी। आजादी के बाद इन रियासतों को भारत या पाकिस्तान में विलय या फिर स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था। सरदार पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, चतुराई और डिप्लोमेसी की बदौलत इन रियासतों का भारत में विलय करवाया था।

कहा कि हैदराबाद के निजाम उस्मान अली खान आसिफ ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया, निजाम ने फैसला किया कि वे न तो भारत और न ही पाकिस्तान में शामिल होंगे, सरदार पटेल ने हैदराबाद के निजाम को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन पोलो चलाया, साल 1948 में चलाया गया ऑपरेशन पोलो एक गुप्त ऑपरेशन था, इस ऑपरेशन के जरिए निजाम उस्मान अली खान आसिफ को सत्ता से अपदस्त कर दिया गया और हैदराबाद को भारत का हिस्सा बना लिया गया।

इस दौरान अध्यापक शम्भूदयाल वर्मा, भवानी शंकर, स.अ. इन्दिरा जैन, शि.मि. बेवी राजा, राजीव बख्शी, स.अ. संदीप कुमार, सन्तोष कुमार त्रिपाठी, खिलावन सिंह, ध्रुव प्रसाद विश्वकर्मा, प्रताप सिंह, पवन सिंह, राहुल कुमार झां, घूमन सिंह, रामपाल सिंह, कीरत सिंह, यशवंत कुमार शर्मा, संजय सिंह, वी.पी. भर्तेले, इन्द्रपाल सिंह, रामेश्वर सिंह, ऋतुकीर्ति, ज्योति मिश्रा, प्रतीक्षा दुवे, सुमित झा, अरविंद सिंह, हरीराम,  ऊदल सिंह, शंकर लाल आदि सहित छात्र-छात्रायें उपस्थित रहीं।


सलाम खाकी न्यूज़ ललितपुर से इंद्रपाल सिंह की रिपोर्ट

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