किसी भी प्रचार - प्रसार का तरीका राहगीरो के कदमों के नीचे नही होता
* पैरों के नीचे आने से तो वह पहले ही नष्ट हो जाता है
* सडको पर लिखवाने से क्या आम जनता के पैसे का नही हो रहा दुरूपयोग
शामली ( उ०प्र० ) 17 अप्रैल 2020
कोरोना की बीमारी का संदेश व उसका बचाव के नियमों को सड़को पर पोस्टर बनवा कर लिखवा जा रहा है ।
जिले में अभी तक सडकों पर 4
जगहों पर कोरोना से बचाव का ये संदेश लिखा गया है । देखने वाली बात ये है कि क्या सडको पर बाइक सवारों , कार सवारों साईकिल सवारों , ट्रैक्टर पर सवारों को रूककर पढकर जाना पडेगा । यदि ऐसा नही हुआ तो उस लिखे का क्या फायदा।सिवाये उसको रोंद कर चलने के । कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोरोना वायरस से बचने व लोकडाऊन का पालन करने तथा सोशल डिस्टैंस का पालन करने के उपायों को सडको पर लिखवा कर नगर पालिका शामली ने केवल आम जनता के पैसे का दुरूपयोग किया गया है ।
सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रत्येक मैसेज लिखने वाले पेंटर के अनुसार ₹35 सो रुपये के हिसाब से खर्चा आया है । इस समबन्ध मे जब शामली के अधीशासी अधिकारी के फोन पर सम्पर्क कर उनका पक्ष जानना चाहा तो फोन सम्पर्क नही हुआ । इस मामले पर आम लोगों ने कुछ सवाल खडे किये है ।
आम जनमानस के सवाल --
1--- चलते हुए वाहन पर इंसान कैसे पढेंगे इस मैसेज को ....
2 --- रोड पर वाहन से चलते हुए इंसान , पढने के चक्कर में कैसे सुरक्षित आगे बढ़ेंगे
3 --- क्या इन लोगों के द्वारा मेसिज पर खर्च किये गए रुपये में पोस्टर ( बैनर ) लगाना सही नही था .
जो दूर तक लोगो को दिखता ओर एक साथ सैकड़ो लोगो को मेसिज जाता ।
4 -- अगर रुक कर राहगीर मेसिज पढ़ेगा तो क्या कोरोना पर प्रधान मंत्री जी के द्वारा दिये गए पालन सोसल डिस्टेंस के नियम की धज्जियां नही उड़ेगी ।
5 -- अगर छोटे वाहन मेसिज के ऊपर को चलते रहेंगे तो क्या ये मेसिज कितने दिन चलेगा ।
6 -- क्या इस मेसिज की तुलना में पोस्टर ( बैनर ) एक साथ दूर तक ज्यादा लोगो को जागरूक नही करता ।
इस प्रकार शामली के लोगों ने सडको पर लिखे इस प्रचार - प्रसार को सीरे से नकार दिया है । और इसे नगर पालिका की फिजूल खर्ची करार दिया है । जिसमे अधिशासी पर अगुलिया उठ रही है ।
सलाम खाकी न्यूज शामली डैस्क से समाचार सम्पादक की रिपोर्ट



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