रमगढा में शान्ति नाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव में मनाया गर्भ कल्याणक
भगवान के माता-पिता की हुई गोद भराई
जीवन को समुन्नत बनाते हैं अच्छे संस्कार : मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज
ललितपुर उ०प्र० 5 फरवरी 2020
परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभसागर जी महाराज एवं श्रमण मुनि श्री प्रणतसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में
रमगढ़ा में शांतिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में बुधवार को भगवान के गर्भ कल्याणक के उत्तर रूप की क्रियाओं को पात्रों द्वारा विधि विधान के साथ सम्पादित किया गया।
सर्वप्रथम प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, जाप, पूजन की गई। इसके बाद गर्भकल्याणक की पूजन, हवन किया गया। दोपहर में सीमंतनी क्रिया में माता की गोद भराई की गई। माता पिता जमुना प्रसाद-प्रभादेवी जैन अदावन शाहगढ़ बने हैं। मंदिर वेदी शुद्धि संस्कार की क्रियाओं को सम्पन्न किया गया। रात्रि में आरती, शास्त्र सभा के बाद भगवान की माता का जागरण, स्नान, श्रृंगार, 56 कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण, महाराज का दरबार, माता का आगमन और स्वप्नफल को मंच पर दर्शाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। विधि विधान की क्रियाएं पंडित राकेश वैसा और पंडित अखिलेश शास्त्री आदि ने संपन्न कराया।
इस अवसर पर मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि पंच कल्याणक में गर्भ कल्याणक के साथ संस्कारों की चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है। जीवन को समुन्नत करना ही संस्कारों का मुख्य उद्देश्य है। व्यक्ति के जीवन की संपूर्ण शुभ और अशुभवृत्ति उसके संस्कारों के अधीन है जिनमें से कुछ वह पूर्व भव से अपने साथ लाता है व कुछ इसी भव में संगति व शिक्षा आदि के प्रभाव से उत्पन्न करता है। इसीलिए गर्भ में आने के पूर्व से ही बालक में विशुद्ध संस्कार उत्पन्न करने के लिए विधान बताया गया है। संस्कार एक ऐसी प्रकाश की किरण है जो हमेशा आदमी के साथ रहती है।
आयोजन को सफल बनाने में महोत्सव की आयोजन समिति व उप समिति उल्लेखनीय योगदान रहा।इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है पंचकल्याणक
महोत्सव के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय बताते हैं कि पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुँचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलम्बन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है।
महोत्सव में तीसरे दिन गुरुवार को भगवान का जन्मकल्याणक मनाया जाएगा। भावी भगवान के जन्मोत्सव को देखने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
भगवान के माता-पिता की हुई गोद भराई
जीवन को समुन्नत बनाते हैं अच्छे संस्कार : मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज
ललितपुर उ०प्र० 5 फरवरी 2020
परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभसागर जी महाराज एवं श्रमण मुनि श्री प्रणतसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में
रमगढ़ा में शांतिनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में बुधवार को भगवान के गर्भ कल्याणक के उत्तर रूप की क्रियाओं को पात्रों द्वारा विधि विधान के साथ सम्पादित किया गया।
सर्वप्रथम प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, जाप, पूजन की गई। इसके बाद गर्भकल्याणक की पूजन, हवन किया गया। दोपहर में सीमंतनी क्रिया में माता की गोद भराई की गई। माता पिता जमुना प्रसाद-प्रभादेवी जैन अदावन शाहगढ़ बने हैं। मंदिर वेदी शुद्धि संस्कार की क्रियाओं को सम्पन्न किया गया। रात्रि में आरती, शास्त्र सभा के बाद भगवान की माता का जागरण, स्नान, श्रृंगार, 56 कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण, महाराज का दरबार, माता का आगमन और स्वप्नफल को मंच पर दर्शाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। विधि विधान की क्रियाएं पंडित राकेश वैसा और पंडित अखिलेश शास्त्री आदि ने संपन्न कराया।
इस अवसर पर मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि पंच कल्याणक में गर्भ कल्याणक के साथ संस्कारों की चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है। जीवन को समुन्नत करना ही संस्कारों का मुख्य उद्देश्य है। व्यक्ति के जीवन की संपूर्ण शुभ और अशुभवृत्ति उसके संस्कारों के अधीन है जिनमें से कुछ वह पूर्व भव से अपने साथ लाता है व कुछ इसी भव में संगति व शिक्षा आदि के प्रभाव से उत्पन्न करता है। इसीलिए गर्भ में आने के पूर्व से ही बालक में विशुद्ध संस्कार उत्पन्न करने के लिए विधान बताया गया है। संस्कार एक ऐसी प्रकाश की किरण है जो हमेशा आदमी के साथ रहती है।
आयोजन को सफल बनाने में महोत्सव की आयोजन समिति व उप समिति उल्लेखनीय योगदान रहा।इस दौरान सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है पंचकल्याणक
महोत्सव के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय बताते हैं कि पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैन समाज का सर्वाधिक महत्वपूर्ण महोत्सव है। यह आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया का महोत्सव है। पौराणिक पुरुषों के जीवन का संदेश घर-घर पहुँचाने के लिए इन महोत्सवों में पात्रों का अवलम्बन लेकर सक्षम जीवन यात्रा को रेखांकित किया जाता है।
महोत्सव में तीसरे दिन गुरुवार को भगवान का जन्मकल्याणक मनाया जाएगा। भावी भगवान के जन्मोत्सव को देखने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है।



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