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भाईयों की लम्बी आयु के लिए क्यों मनाया जाता है भैय्या दूज का त्यौहार , जाने

इस मौके पर बहनें भाईयों को तिलक लगाकर उनकी‌ लम्बी आयु की कामना प्रभु से करती है और हाथों मे कलावा बांधकर अपनी रक्षा का वचन लेती है ।



        भाई दूज का पर्व दिवाली के दूसरे दिन यानी गोवर्धन पूजा के अगले दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह आज 29 नवंबर को है। दरअसल भाई दूज का इतिहास बहुत पुराना है, जो मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है। यमराज हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर जाते हैं। वह उनको तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। यमराज ने अपनी बहन को एक वरदान दिया था, जिसके कारण हर वर्ष भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। भाई दूज के पर्व पर जाते हैं यमराज और यमुना की पौराणिक कथा के बारे में।
भाई दूज की कथा
सूर्य देव की पत्नी संज्ञा की दो संतानें थींं। बेटा यमराज और बेटी यमुना। दोनों भाई बहन में बहुत प्रेम था। यमुना हर वर्ष अपने भाई यमराज से मिलने उनके घर जाती थीं, उनका कुशलक्षेम पूछती थीं। यमराज को वो अपने घर बुलाती थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से वे नहीं जा पाते थे। एक बार यमराज बिना बताए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को अपनी बहन यमुना के घर पहुंच गए।
भाई को देखकर यमुना बेहद खुश हुईं। उन्होंने तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। स्वादिष्ट भोजन कराए। यमराज ने भी यमुना को कई उपहार दिए। जब वे अपनी बहन के घर से चलने लगे तो प्रेमवश उन्होंने बहन से कोई एक वरदान मांगने को कहा। तब यमुना ने उनसे कहा कि आप हर वर्ष इस तिथि का मेरे घर आएंगे और भोजन करेंगे। इसी तर​ह जो भाई इस तिथि को अपनी बहन के घर जाएगा, तिलक लगवाएगा और भोजन करेगा। अपनी बहन को उपहार देगा, आप उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करेंगे। इसके साथ ही आपका उसे कोई डर नहीं रहेगा।
यमराज अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्होंने बहन को वो वरदान दे दिया। इसके बाद से हर वर्ष भाई दूज का पर्व मनाया जाने लगा।

सलाम‌ खाकी‌ ऊन (शामली) से विक्रान्त वर्मा के साथ सलेक वर्मा  की रिपोर्ट


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